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Karta Karak - कर्ता कारक "प्रथम विभक्ति" की परिभाषा, चिन्ह, उदाहरण |

Karta karak

कर्त्ता कारक की परिभाषा

Karta karak ki bharibhasha - कर्त्ता के जिस रूप से कार्य के करने वाली क्रिया का बोध होता है उसे कर्त्ता कारक कहते है। इसके विभक्ति का चिह्न " ने " है। इस ने चिह्न का वर्तमानकाल और भविष्यकाल में प्रयोग नहीं होता है। जबकि इसका सकर्मक धातुओं के साथ भूतकाल में प्रयोग होता है।

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कर्ता कारक के उदाहरण - 

(1)राम ने रावण को मारा। (2) लड़का स्कूल जाती है।

व्याख्या (1) - पहले वाक्य में क्रिया का कर्ता राम है। इसमें " ने " कर्ता कारक का विभक्ति-चिह्न है। इस वाक्य में मारा भूतकाल की क्रिया है। " ने " का प्रयोग प्रायः भूतकाल में होता है। 

व्याख्या (2) - दूसरे वाक्य में वर्तमानकाल की क्रिया का कर्ता लड़की है। इसमें " ने " विभक्ति चिन्ह का प्रयोग नहीं हुआ है।

कर्ता कारक के नोट Points - 

(1) - भूतकाल में अकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ भी ने परसर्ग (विभक्ति चिह्न) नहीं लगता है। 
जैसे-वह हँसा।

(2) -
 वर्तमानकाल व भविष्यतकाल की सकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ ने परसर्ग का प्रयोग नहीं होता है। जैसे - वह फल खाता है।, वह फल खाएगा।

(3) - कभी-कभी कर्ता के साथ ‘को’ तथा ‘स’ का प्रयोग भी किया जाता है। 
जैसे- बालिका को सो जाना चाहिए।, 
सोहन से पुस्तक पढ़ी गई।, 
अल्का से चला भी नहीं जाता।

कर्त्ता कारक(प्रथमा विभक्ति) के सूत्र

विषय - संस्कृत

1. 
सूत्र - स्वतंत्र कर्त्ता ]
क्रिया करने में जिसकी स्वतंत्रता मानी जाए वह कर्ता कारक होता है |
जैसे - मोहनः पठति |
        वाक्य में कर्ता की स्थिति के अनुसार संस्कृत में वाक्य तीन कारक के होते है |
(1) कर्तृ वाच्य (2) कर्म वाच्य (3) भाव वाच्य

2. सूत्र - [ प्रातिपदिकार्थलिङ्गपरिमाणवचनमात्रे प्रथमा ]
प्रातिपदिकार्थ मात्र तथा लिंग मात्र, परिमाण एवं वचन मात्र के आधिक्य में प्रथमा विभक्ति होती है। 

प्रातिपदिकार्थ का अर्थ - प्रातिपदिकार्थ से तात्पर्य है की जिनसे स्वार्थ , द्रव्य , लिंग, संख्या और कारक इन पांचो में, जिसका ज्ञान निश्चित रूप से हो उसे प्रातिपदिकार्थ कहते है |

जैसे -  उच्चै:, लता, फलम् , रामः पठति, आदि।

लिङ्ग मात्र का आधिक्य का अर्थ - जिन शब्दों के लिंग निश्चित नहीं होते है | उन शब्दों के लिंग मात्र में प्रथम विभक्ति होती है|
जैसे - एकः, द्वौ: , बहवः |

3. सूत्र - [ सम्बोधने च प्रथमा ]
हिन्दी के संबोधन कारक में प्रथमा विभक्ति होती है। 
जैसे - हे राम ! अत्र आगच्छ।

4. सूत्र - [ क्रिया सम्पादकः कर्त्ता ]
जो क्रिया का सम्पादन करे वह कर्त्ता कारक होता है। 
जैसे - प्रवरः पठति। 
इस वाक्य में पठति क्रिया का सम्पादन 'प्रवर' करता। है। इसलिए ‘प्रवर' कर्ता कारक में आया ।


5. 
सूत्र - [ उक्ते कर्त्तरि प्रथमा ]
कर्तृवाच्य में जहाँ कर्ता उक्त या कहा गया होता है | उसमे विभक्ति होती है |
जैसे - रामः गृहम गच्छति | 
स्पष्ठीकरण - उक्त वाक्य में राम कर्तृ वाच्य कर्ता है जो कि उक्त है अर्थात जिसके बारे में कहा जा रहा है अर्थात राम में प्रथम विभक्ति होगी |

6. 
सूत्र - [ अभिधेयमात्रे प्रथमा ]
यदि केवल नाम ही व्यक्त करना हो तो उसमें प्रथमा विभक्ति होती है। 
जैसे- गजः, देवः, कृष्णः,बालकः, रामः आदि ।

7. सूत्र - [ अव्यययोगे प्रथमा ]
अव्यय शब्दों के योग में प्रथमा विभक्ति होती है। 
जैसे - रामः इति राजा आसीत् ।

8. 
सूत्र - [ प्रयोजक कर्त्तरि प्रथमा ]
प्रयोजक कर्ता में प्रथमा विभक्ति होती है। 
जैसे- शिक्षकः छात्रं पर्यावरणं दर्शयति।


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